महाराष्ट्र में कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, आस्था और पहचान का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैँ। महंत रवींद्र पुरी जी महाराज।

डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
11 मई, 2026

महाराष्ट्र मे कुंभ मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, आस्था और पहचान का एक बहुत बड़ा हिस्सा हैँ।

परम पूज्य रवींद्रपुरी जी महाराज अखाड़ा परिषद अध्यक्ष कुंभ पर्व पर गोदावरी नदी के तट पर स्नान करने से आत्मा पवित्र होती है और पिछले जन्मों के पाप धुल जाते हैं।

त्र्यंबकेश्वर और नासिक को बेहद पवित्र माना जाता है क्योंकि यहां साक्षात् त्रिदेवो का निवास हैँ। कुम्भ मेला महाराष्ट्र की समृद्ध संस्कृति और विरासत का प्रतीक है।

कुंभ मेला भारतीय समावेशी सांस्कृतिक भावना को दर्शाता है, जहाँ सभी लोग जाति और विचारधारा से ऊपर उठकर एक साथ स्नान करते हैं। महाराष्ट्र के लोग कुंभ पर्व पर साधु-संतों के शाही स्नान और उनके जमावड़े को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं।

वे इसे ज्ञान और आध्यात्मिकता का संगम मानते हैं। स्थानीय निवासियों और सरकार के लिए, यह बड़े पैमाने पर पर्यटन और आर्थिक गतिविधि का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता महाराष्ट्र में प्रमुख कुंभ मेला (सिंहस्थ) जुलाई-अगस्त 2027 त्र्यंबकेश्वर और नासिक में गोदावरी नदी के तट पर आयोजित होगा, और इसकी शुरुआती तैयारियां जोर शोर से चल रहे हैँ। संक्षेप में, महाराष्ट्र के लोग कुंभ को एक ‘अमर विरासत’ मानते हैं जो उन्हें उनकी जड़ों और परमात्मा से जोड़ती है। कुंभ मेला भारत की समावेशी सांस्कृतिक भावना का प्रतिबिंब है।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना हैँ कि कुंभ मेला भारत की समावेशी सांस्कृतिक भावना को दर्शाता है, जहां लोग जाति और विचारधारा से परे एक साथ आते है और सनान करते हैँ। माँ भगवती मनसा देवी का आशीर्वाद आप सब पर सदैव बना रहे।

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