डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
22 जुलाई, 2026
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय का ऐतिहासिक कदम: ‘केदार मानस पञ्चाङ्ग’ और ‘शोध प्रज्ञा’ का विमोचन
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय ने संस्कृत साहित्य, वैदिक परम्परा और शोध के क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए अपना पहला केदार मानस पञ्चाङ्ग प्रकाशित किया है। इस पञ्चाङ्ग का भव्य विमोचन मंगलवार को लोकभवन, देहरादून में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल ले.ज. (सेवानिवृत्त) सरदार गुरमीत सिंह के कर-कमलों द्वारा किया गया।
राज्यपाल सरदार गुरमीत सिंह ने ‘केदार मानस पञ्चाङ्ग’ का विमोचन करते हुए इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम से जुड़ी तिथियों, व्रत-त्योहारों, मुहूर्तों और पूजा-पद्धति को एक स्थान पर संकलित करना आमजन और तीर्थयात्रियों दोनों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक और शोध कार्यों की भरपूर प्रशंसा की। उन्होंने कहा – “पहली बार विश्वविद्यालय ने पञ्चाङ्ग का प्रकाशन कर महनीय कार्य की शुरुआत की है। यह कदम न केवल उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के लिए, बल्कि पूरे देश के संस्कृत विश्वविद्यालयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा। मेरा विश्वास है कि इस प्रयास को देखकर अन्य विश्वविद्यालय भी अपने प्रकाशन कार्य को आगे बढ़ाएंगे।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिका शोध प्रज्ञा का विमोचन भी किया गया। यह पत्रिका विश्वविद्यालय में हो रहे उच्च-स्तरीय शोध कार्यों, आलेखों और वैदिक अध्ययन को प्रकाश में लाने का मंच बन रही है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रमाकान्त पाण्डेय ने कुलाधिपति को विश्वविद्यालय की वर्तमान गतिविधियों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में वेद, योग, व्याकरण,ज्योतिष, पौरोहित्य और पञ्चाङ्ग विज्ञान जैसे विषयों पर मौलिक शोध को प्राथमिकता दी जा रही है। शोध की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाने के लिए नई योजनाएं भी बनाई जा रही हैं।
इस पञ्चाङ्ग को विशेष रूप से बद्री केदारनाथ धाम और उत्तराखंड के पर्वतीय पंचांग परम्परा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें शुभ मुहूर्त- स्थानीय पर्व-त्योहार और व्रत- ग्रह-नक्षत्र गणना और धार्मिक अनुष्ठानों की तिथियां
शामिल की गई हैं।
राज्यपाल ने कहा कि इस तरह के प्रकाशन संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने और हमारी सनातन परम्पराओं को संरक्षित करने में मदद करेंगे। विश्वविद्यालय का यह प्रयास “देवभूमि उत्तराखंड” की आध्यात्मिक पहचान को और मजबूत करेगा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक,डॉ प्रकाश पन्त,डॉ सुमन प्रसाद भट्ट , सुशील चमोली सहभागी रहे।

