डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
25 जुलाई, 2026
लेखक गांव स्थित ‘प्रकृति की पाठशाला’ में उत्तराखंडी टूरिज्म रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन (उत्तरा) की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी की ओर से पर्यटन क्षेत्र को लेकर मंथन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री और लेखक गांव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि राज्य की पर्यटन नीति केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। पर्यटन विकास का आधार प्रदेश की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक विरासत का संरक्षण तथा पर्यटकों को गुणवत्तापूर्ण अनुभव उपलब्ध कराना होना चाहिए। डॉ. निशंक ने कहा कि तीर्थाटन और पर्यटन की अपनी अलग-अलग अवधारणाएं और महत्ता हैं। राज्य के पर्यटन विकास की योजनाएं बनाते समय दोनों के स्वरूप को समझना आवश्यक है। उत्तराखंड तीर्थ, दर्शन, प्रकृति और सौंदर्य की भूमि है। यहां तीर्थाटन केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मिक ऊर्जा और जीवन मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। वहीं पर्यटन प्रकृति, संस्कृति और स्थानीय जीवनशैली से जुड़ने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि पर्यटन स्थलों का विकास उनकी वहन क्षमता को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
पर्यटन का उद्देश्य केवल भीड़ बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक पर्यटक को बेहतर, सुरक्षित और यादगार अनुभव प्रदान करना होना चाहिए। इसके लिए अधोसंरचना और पर्यटन योजनाओं का विस्तार भी उसी अनुरूप किया जाना जरूरी है।
स्लो टूरिज्म पर विशेष जोर
डॉ. निशंक ने लेखक गांव को साहित्य, संस्कृति और प्रकृति के संगम का केंद्र बताते हुए यहां स्लो टूरिज्म, साहित्य पर्यटन और आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक यात्रा मार्गों का पुनर्जीवन, स्थानीय संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में स्लो टूरिज्म महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे पर्यटन उद्यमियों, होटल व्यवसायियों, ट्रैवल ऑपरेटरों और पर्यटन विशेषज्ञों ने पर्यटन क्षेत्र के विकास तथा संगठन को मजबूत बनाने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
पर्यटन क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय
मंथन कार्यक्रम में ‘उत्तरा’ को उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद से औपचारिक मान्यता दिलाने और परिषद की सलाहकार समिति में संगठन का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर सहमति बनी। इसके अलावा पर्यटन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्यमियों और नवाचारकर्ताओं को समय-समय पर ‘उत्तरा पर्यटन सम्मान’ प्रदान करने का निर्णय लिया गया। प्रत्येक जनपद में स्थानीय युवाओं के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन का डिजिटल डाटाबेस तैयार कर उसे उपयुक्त पोर्टल पर उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी। इसके साथ ही लेखक गांव में ‘जिम्मेदार पर्यटन’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने तथा राज्य में पर्यटन सर्किट, स्लो टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय समुदाय की सहभागिता पर आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया गया। ‘उत्तरा’ के अध्यक्ष प्रशांत मैठाणी ने संगठन की भावी कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तराखंड में पर्यटन को केवल व्यवसाय तक सीमित न रखकर स्थानीय समाज, संस्कृति और प्रकृति से जोड़ते हुए जनआंदोलन बनाने की दिशा में संगठन कार्य करेगा।कार्यक्रम में उपाध्यक्ष सुनील राणा, सचिव देव पोखरियाल, संयुक्त सचिव मोहित शर्मा और अजय कंडारी, कोषाध्यक्ष महेंद्र घिल्डियाल, कार्यकारिणी सदस्य गजेंद्र मेहरा, राकेश पंत, गौरव शर्मा, अल्पेश कुमार सहित प्रदेशभर से आए पर्यटन उद्यमियों ने सतत, जिम्मेदार और रोजगारपरक पर्यटन मॉडल विकसित करने पर अपने विचार रखे।

