श्रवण कुमार की मिसाल – कांवड़ में माता-पिता को बैठाकर बागपत रवाना हुए संजीव

डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
28 जुलाई, 2026

आज के दौर में जहां भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण लोग अपने माता-पिता के लिए समय निकालने में भी कठिनाई महसूस करते हैं, वहीं संजीव कुमार और अनिल कुमार ने अपनी सेवा-भावना से समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। दोनों भाइयों ने अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से बागपत के लिए कांवड़ यात्रा शुरू की।

श्रवण कुमार की याद दिलाने वाला यह दृश्य देखने के लिए राहगीरों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने दोनों भाइयों की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं है। यात्रा के दौरान संजीव और अनिल ने बताया कि उनके लिए अपने माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है और उनका आशीर्वाद ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।

रास्ते में श्रद्धालुओं ने दोनों भाइयों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उनकी इस अनूठी पहल की सराहना की। यह भावुक दृश्य लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। दोनों भाइयों की यह सेवा-भावना समाज को यह संदेश देती है कि माता-पिता का सम्मान और उनकी सेवा ही सच्चा धर्म है तथा उनके आशीर्वाद से ही जीवन सफल और सार्थक बनता है।

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