डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
11 सितंबर, 2026
उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण: संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय को महाराष्ट्र का प्रतिष्ठित महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार
- देवभूमि उत्तराखंड के लिए गौरव और हर्ष का क्षण है। महाराष्ट्र शासन के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा दिया जाने वाला देश का अत्यंत प्रतिष्ठित सम्मान महाकवि कालिदास संस्कृत साधना पुरस्कार इस वर्ष उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के यशस्वी कुलपति प्रो. रमाकान्त पाण्डेय को प्रदान किये जाने की घोषणा की गई है।
महाराष्ट्र शासन ने बुधवार को चयन समिति की अनुशंसा के बाद वर्ष के कालिदास पुरस्कारों की सूची जारी की। इस सूची में अन्य राज्य श्रेणी (Other State Category) के अंतर्गत प्रो. पाण्डेय का चयन किया गया है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा यह पुरस्कार प्रतिवर्ष संस्कृत भाषा, साहित्य, दर्शन और संस्कृति के क्षेत्र में आजीवन साधना करने वाले देश के 8 मूर्धन्य विद्वानों को दिया जाता है। यह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि संस्कृत के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर की गई तपस्या की स्वीकृति है।
प्रो. रमाकान्त पाण्डेय वर्तमान में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति के रूप में कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर के निदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
उनका व्यक्तित्व एक आदर्श शिक्षक, प्रखर शोधकर्ता, कुशल प्रशासक और परम्परा के पुनरुद्धारक का अद्भुत संगम है।
उनकी शैक्षणिक यात्रा पर एक दृष्टि: - अध्यापन एवं शोध अनुभव: 31 वर्ष, जिसमें 14 वर्ष से अधिक प्रोफेसर के रूप में
- प्रशासनिक अनुभव: 15 वर्षों का सुदीर्घ अनुभव
- शोध निर्देशन: 25 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान, 8 शोधार्थी वर्तमान में शोधरत
- अभूतपूर्व प्रकाशन: 65 ग्रंथों का लेखन, 150 शोध पत्र, 22 साहित्यिक लेखों का प्रकाशन और 7 शोध पत्रिकाओं का संपादन
- राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सहभागिता: 86 राष्ट्रीय संगोष्ठियों, 15 अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों और 57 कार्यशालाओं में सहभागिता। थाईलैंड, लंदन, आयरलैंड और नेपाल जैसे देशों में भारत और संस्कृत का प्रतिनिधित्व।
प्रो. पाण्डेय की 27 पुस्तकें देश के विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में निर्धारित हैं। छात्र जीवन से ही उनकी प्रतिभा अलौकिक रही है। मध्य प्रदेश संस्कृत अकादमी द्वारा उन्हें शास्त्रार्थ और संस्कृत लेखन के लिए अखिल भारतीय स्तर पर दो बार ‘नवोदित प्रतिभा सम्मान’ तथा एक लाख रुपये का प्रतिष्ठित ‘संस्कृत गौरव पुरस्कार’ सहित लगभग एक दर्जन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। अब तक उन्हें 14 राज्य स्तरीय एवं राष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।
प्रो. पाण्डेय अपनी पीढ़ी के अकेले ऐसे विद्वान हैं, जिन्होंने लुप्त होती जा रही पारम्परिक टीका लेखन परम्परा को पुनरुज्जीवित किया है। उन्होंने महाकवि गंगाधर शास्त्री कृत ‘अलिविलासिसंलाप’, पंडित गोकुलनाथ कृत ‘शिवशतक’ तथा आचार्य अभिनवगुप्त के दुर्लभ स्तोत्रों पर गहन और विद्वत्तापूर्ण टीकाएं लिखी हैं, जिनकी देश भर के विद्वानों ने मुक्त कंठ से सराहना की है।
कुलपति के रूप में उन्होंने उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सफल क्रियान्वयन के साथ-साथ उन्होंने कर्मकांड, ज्योतिष जैसे पारम्परिक विषयों के साथ-साथ अनुवाद विज्ञान और संस्कृत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे अत्याधुनिक पाठ्यक्रमों को प्रारंभ कर संस्कृत को भविष्य की तकनीक से जोड़ा है।
महाराष्ट्र शासन द्वारा इस राष्ट्रीय सम्मान की घोषणा के बाद से उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष व्याप्त है। विश्वविद्यालय के शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने कुलपति जी को बधाई दी है। प्रदेश के अनेक विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, संस्कृत अकादमी तथा सम्पूर्ण संस्कृत जगत ने इस उपलब्धि पर प्रो. पाण्डेय को शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। निश्चित रूप से यह सम्मान केवल प्रो. रमाकान्त पाण्डेय की व्यक्तिगत साधना का सम्मान ही नही, अपितु यह उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय और सम्पूर्ण उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृत परम्परा का राष्ट्रीय मंच पर अभिनंदन है।

