डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
26 मई, 2026
दुनिया में डॉक्टर शरीर का इलाज करते हैं, लेकिन एक सच्चा संत इंसान की आत्मा को मज़बूत कर देता है। महाराज प्रेमानंद जी का यह संदेश सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों का संबल है। जय जय श्री राधे।
वृंदावन की पावन भूमि पर रोज रात को होने वाली पूज्य प्रेमानंद जी महाराज की वो प्रसिद्ध ‘रात्रि पदयात्रा’ (जिसमें देश-विदेश से लोग उनके दर्शन के लिए तड़पते थे) स्वास्थ्य कारणों की वजह से फिलहाल रोक दी गई है। हम सब जानते हैं कि महाराज जी का शरीर पिछले कई सालों से एक बहुत कठिन दौर से गुज़र रहा है, जहाँ उन्हें नियमित रूप से डायलिसिस की ज़रूरत पड़ती है। इतने भारी शारीरिक कष्ट के बावजूद, उन्होंने जो संदेश अपने भक्तों को दिया है, वो सुन कर आँखें नम हो जाती हैं। महाराज श्री ने कहा-
“मैं भले ही आपसे (पदयात्रा में) न मिल पाऊँ, लेकिन मैं हमेशा आपके साथ हूँ। बिल्कुल मत डरना, मेरी चिंता मत करना, बस निरंतर भगवान का नाम जपते रहना।”
आज के इस मतलबी दौर में जहाँ लोग छोटे से सरदर्द में बिखर जाते हैं, वहाँ एक संत अपनी दोनों किडनियां खराब होने के बाद भी सिर्फ़ इस बात के लिए चिंतित है कि उनके भक्तों का ‘नाम जप’ और ‘भरोसा’ कमजोर न पड़ जाए। इसे ही कहते हैं एक सच्चे संत की निश्छल करुणा।
यह समय महाराज जी के लिए चिंता करने का नहीं, बल्कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर ‘राधा राधा’ जपने का है। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि महाराज श्री को दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करें ताकि उनका मार्गदर्शन हमें मिलता रहे।
जय जय श्री राधे राधे

