डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
14 अक्टूबर, 2026
अहंकार करने से श्रीहीन होना पड़ता है: – परमाराध्य शंकराचार्य जी महाराज
श्रीविद्या मठ में आयोजित नवरात्र आयोजन में परमाराध्य उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज ने साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
पौराणिक प्रसंग: महर्षि दुर्वासा ने देवराज इंद्र को दिव्य पारिजात माला भेंट की, इंद्र ने अहंकारवश उसे ऐरावत हाथी के मस्तक पर रख दिया, ऐरावत ने उसे कुचल दिया। दुर्वासा ने इंद्र को श्रीहीन होने का शाप दिया, संपूर्ण स्वर्गलोक से श्री लुप्त हो गई। इसलिए पद, प्रतिष्ठा का अहंकार नहीं करना चाहिए।
श्रीविद्या साधना शिविर में स्फटिक मणिनिर्मित भगवती राजराजेश्वरी की दिव्य प्रतिमा विराजमान है।

