डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
अप्रैल-29, 2026
वन, गाँव और शहरी स्तर पर स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की सबसे बुनियादी इकाई है। इन इकाईयों के प्रतिनिधि जब आपस में विचार-विमर्श करते हैं, तो कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान यहां से निकलता है। प्रकृति और विकास के बीच कैसे समन्वय बनाकर रखा जा सकता है, ऐसे कॉन्सेप्ट यहां से विकसित होते हैं।
इस संवाद में मेरा अनुभव रहा कि उत्तराखंड में वन पंचायतें जनभागीदारी का उत्कृष्ट मॉडल हैं। यहॉं के लोग सहभागिता से जल, जंगल, जमीन व प्रकृति के संरक्षण का कार्य कर कर रहे हैं, तथा जनभागीदारी से वन क्षेत्र में रोजगार और आत्मनिर्भरता का विकास हो रहा है। इस पूरी संरचना में महिलाओं की सक्रियता और अच्छी संख्या देखकर विशेष प्रसन्नता हुई।
देवभूमि में स्थानीय स्तर पर वन और ग्राम पंचायतें जिस तरह ‘ग्राम स्वराज’ को साकार कर रही हैं, उसी तरह यहां नगर निकाय भी शहरी विकास को नई गति और दिशा दे रहे हैं। पिछले वर्ष ‘नगर निकायों के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन’ में भी हमने विमर्श किया था कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच हमारे नगर निकाय ‘Vikasit Bharat 2047’ के सपने को पूरा करने में किस प्रकार अपनी भूमिका निभा सकते हैं।
निश्चय ही भारत में लोकतंत्र शासन पद्धति होने के साथ ही हमारे जीवन का संस्कार भी है। स्थानीय स्वशासन की इन इकाईयों ने इस भावना को ना सिर्फ़ बनाए रखा है, बल्कि इसे और सशक्त किया है। इस अवसर पर नैनीताल लोकसभा के सदस्य माननीय अजय भट्ट कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत जी नैनीताल जिले के समस्त पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे।

