गंगा जी की महिमा का वर्णन करते एक पुलिस ऑफिस जो केदारनाथ आपदा के समय उस भयानक आपदा को देखा।

डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
08 अगस्त, 2026

कांवड़ यात्रा के पावन अवसर पर मैं हर की पैड़ी पर सेवा दे रहा हूँ। बात 2013 की है केदार नाथ आपदा के समय मैं इसी चौकी में चौकी प्रभारी था केदार नाथ आपदा में हज़ारों लोग असमय काल के ग्रास बने। उनकी आत्मा की शांति के लिए धर्मगुरुओं के द्वारा तत्कालीन उत्तराखंड की सरकार को ब्रह्मकुंड पर एक यज्ञ करने का सुझाव दिया। विशाल यज्ञ हुआ मेरे पीछे जो आप घाट देख रहे है, उस पर बल्लियाँ लगाकर पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा एक बड़ा प्लेटफार्म तैयार किया।प्लेटफार्म इस तरह से बना कि इसकी ऊँचाई गंगा जी की धारा से क़रीब 12-15 फुट हो गई। तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री विजय बहुगुणा जी और उनके मंत्रिमंडल के सहयोगी पहुँचे। सभी प्रशासनिक अधिकारी मौके पर थे। यज्ञ प्रारम्भ हुआ। हवन यज्ञ करने से पूर्व देवताओं का आह्वान होता है , कि वे यज्ञ में आयें और आशीर्वाद दें। गंगा जी का भी आह्वाहन हुआ मंत्रोचारण के दौरान ही प्लेटफार्म पर बिछी लाल रंग की मैट गंगा जी की तरफ़ से गीली होने लगी और उसका गीलापन यज्ञ कुंड की और बढ़ने लगा, जब वहाँ बैठे लोगो की मैट गीली लगने लगी तो वो अपनी जगह पर खड़े हो गए और सभी यह देखने लगे कि आख़िर मैट गीली कैसे हो रही है। कुछ देर के लिए अफरा तफरी से मच गई। मौके पर डीएम एसएसपी साहब और अन्य अधिकारियों के साथ मैं भी मौजूद था, इस दौरान डीएम साहब और मुझे भी गंगा जी का जलस्तर बढ़ जाने का अहसास हुआ कम से कम 8-10 फीट ऊपर तक लहरों के आने का अहसास हुआ। हालांकि नीचे लोग नहा भी रहे थे, इस दौरान डीएम साहब ने कहा कि सिंचाई विभाग से पता करो की भीम गौड़ा बैराज से पानी क्यों छोड़ा गया। इसी दौरान यज्ञ में आगे बैठे मंत्री सतपाल महाराज जी द्वारा लोगो को कहा कि आप अपनी जगह बैठ जाए। जब यज्ञ में आह्वान हुआ है तो गंगा माता आयेंगी।यज्ञ होता रहा इस दौरान मैट गीली होते हुए यज्ञ कुंड तक आई मानो यज्ञ कुंड पर गंगा माता ने अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर मृतक आत्माओं को मोक्ष देने का वचन दे दिया। 10 मिनट के अंदर पूरी मैट सूख भी गई। गंगा माता अपने अंदाज में आई । उस दिन से मुझे महसूस हुआ कि यह कोई सामान्य नदी नहीं है,  जिस उद्देश्य से इसे अवतरित किया गया था, वह आज भी अपना वचन पूरा कर रही है। यह बात मैंने पहले भी अपने कई मित्रों को साझा की है। अब “जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत तीन देखही तैसी””जेही पर जेही की सत्य स्नेहु वो तेई मिलही ना कछु संदेहु”। कई लोगो का मानना है की कांवड़िये उद्दंड होते है, लेकिन आप उनकी श्रद्धा और संकल्प को भी देखिए। 400-500 किलोमीटर जल लेकर जाना कोई सामान्य काम नहीं है। मैं भोलों की आस्था का सम्मान करता हूँ। जिस गंगा जी में हमें मरने के बाद प्रवाहित होना है, जीते जी उसकी पवित्रता और आस्था का पूर्ण सम्मान होना चाहिए।गंगा माता सभी को अपने चरणों में स्थान दे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *