डॉ रागिनी गुप्ता, संपादक {हरिद्वार}
08 अगस्त, 2026
हाईकोर्ट के आदेश के बाद धनौरी कॉलेज भूमि प्रकरण गरमाया, 160 बीघा शैक्षणिक भूमि बिक्री की उच्चस्तरीय जांच की मांग।
हरिद्वार के बहुचर्चित नेशनल इंटर कॉलेज, धनौरी की लगभग 160 बीघा सार्वजनिक शैक्षणिक भूमि के कथित अवैध विक्रय का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। उत्तराखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले में कानूनी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। विधि विशेषज्ञ कृष्णकांत के मार्गदर्शन में नेशनल पब्लिक सर्विस ट्रस्ट के सचिव प्रियांशु कम्बोज ने जिलाधिकारी हरिद्वार को विस्तृत अभ्यावेदन एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
अभ्यावेदन में आरोप लगाया गया है कि करोड़ों रुपये मूल्य की लगभग 160 बीघा ग्राम समाज की सार्वजनिक शैक्षणिक भूमि, जिसे ग्राम सभा शिवदासपुर तेलीवाला द्वारा केवल शिक्षा के उद्देश्य से नेशनल इंटर कॉलेज को उपलब्ध कराया गया था, उसका बिना वैधानिक अधिकार के विक्रय कर दिया गया। शिकायत में कॉलेज प्रबंधक आदेश कुमार तथा अन्य संबंधित व्यक्तियों पर कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए सार्वजनिक संपत्ति का हस्तांतरण करने का आरोप लगाया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि विक्रय के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया, आवश्यक अनुमतियां प्राप्त नहीं की गईं तथा वास्तविक बाजार मूल्य से कम कीमत पर भूमि बेचकर सार्वजनिक संपत्ति को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। पूरे मामले को सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए संबंधित अधिकारियों एवं लाभार्थियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।
हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में जिलाधिकारी को सौंपे गए अभ्यावेदन में मांग की गई है कि भूमि विक्रय से संबंधित सभी अभिलेखों, अनुमतियों, वित्तीय लेन-देन और प्रशासनिक कार्रवाई की गहन जांच कराई जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो भूमि विक्रय को निरस्त कर सार्वजनिक शैक्षणिक भूमि को उसके मूल उद्देश्य के लिए सुरक्षित किया जाए तथा आदेश कुमार सहित सभी जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता एवं अन्य लागू कानूनों के तहत आपराधिक, राजस्व और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

